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श्री गुरु रविदास के मन्दिर में स्वामी गुरदीप जी महाराज गुरु रविदास की वाणी की अमृतबर्षो करते हुए कहा की रविदास जी ईश्वर की भक्ति पर पूर्ण विश्वास करते थे। उनके वाणी की मधुरता और ज्ञान से सभी लोग प्रभावित होते हैं

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गुरु रविदास ने कहा है,कभी भी अपने अंदर अभिमान को जन्म न दें। इस छोटी सी चींटी शक्कर के दानों को बीन सकती है परन्तु एक विशालकाय हाथी ऐसा नहीं कर सकता।

फतेहपुर, 21 फरवरी,जिला चीफ़ व्यूरो विजय समयाल

रविदास महासभा मण्डल फतेहपुर के तत्वावधान में गुरु महाराज रबिदास के 647 जन्म दिबस के अबसर पर शोभायात्रा 10.00 बजे निकाली जो हाडा चौक ,फतेहपुर बाजार से होते हुए शिवा पैलेस फतेहपुर से होते हुए सुनेट,बरोट ,ननुह , रैहन बाजार वाया देहरी से होते हुए पोलटैकनिकल कालेज कदाना ,से कंदोर मे गुरु रविदास मदिर पंहुची जहाँ भव्य स्वागत किया गया ।मुख्य चौराहौं पर पुष्पबर्षा की गई, शोभायात्रा में हजारों लोगों ने वाहनों व पैदल झांकियों के साथ चलते हुए गुरु रविदास के उपदेश क भजन भी गय। गुरु रविदास मदिर कन्दोर में शोभायात्रा का भव्य व सुन्दर स्वागत किया गया।

श्री गुरु रविदास के मन्दिर में स्वामी गुरदीप जी महाराज गुरु रविदास की वाणी की अमृतबर्षो करते हुए कहा की रविदास जी ईश्वर की भक्ति पर पूर्ण विश्वास करते थे। उनके वाणी की मधुरता और ज्ञान से सभी लोग प्रभावित होते हैं। उनके द्वारा कहे शब्द, दोहे, पद और अनमोल वचन (विचार) आज भी हम सभी को सदैव आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करते हैं। कोई भी व्यक्ति छोटा या बड़ा अपने जन्म के कारण नहीं बल्कि अपने कर्म के कारण होता है। व्यक्ति के कर्म ही उसे ऊंचा या नीचा बनाते हैं। हमें हमेशा कर्म करते रहना चाहिए और साथ साथ मिलने वाले फल की भी आशा नहीं छोड़नी चाहिए, क्योंकि कर्म हमारा धर्म है और फल हमारा सौभाग्य। कभी भी अपने अंदर अभिमान को जन्म न दें। इस छोटी सी चींटी शक्कर के दानों को बीन सकती है परन्तु एक विशालकाय हाथी ऐसा नहीं कर सकता।इस पावन अवसर पर अटूट लंगर लगाया जिसमें हजारों लोगों ने भंडारे का प्रशाद छका

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