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हिमाचल प्रदेश का विश्लेषण किया जाए तो चुनावों की दृष्टि से ये राज्य बहुत महत्वपूर्ण है।लेकिन यहां के मतदाताओं के रूझान की वजह यहां का इतिहास काफी रोमांचक रहता है। राजनीतिक दल अंतिम समय तक मतदाताओं की नब्ज समझ नहीं पाते। 

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हिमाचल प्रदेश का विश्लेषण किया जाए तो चुनावों की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है।लेकिन यहां के मतदाताओं के रूझान की वजह यहां का इतिहास काफी रोमांचक रहता है। राजनीतिक दल अंतिम समय तक मतदाताओं की नब्ज समझ नहीं पाते। 

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प्रमुख मुद्दा संसदीय क्षेत्र गगल में हवाई अड्डे का विस्तारीकरण है वंही नौ पंचायतों के लोग इसका विरोध कर रहे हैं। यह भाजपा व कांग्रेस के लिए गले की फांस‌ बना रहेगा। 

भाजपा को हिमाचल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर करिश्मे की आस है। भाजपा को यह उम्मीद है कि पिछले दो आम चुनाव में जिस तरह मोदी फैक्टर ने काम किया, ठीक वैसे ही इस बार भी करेगा।

कांगड़ा चंबा-संसदीय क्षेत्रों में भाजपा व कांग्रेस के मध्य मुकाबला रोचक व तनाव पूर्ण होगा

भाजपा व कांग्रेस कांगड़ा चंवा संसदीय क्षेत्र से किसे चुनावी दंगल में उतारती है उसके उपरांत पता चलेगा की जनता किस को अपने सर माथे र बैठाती है। 

लाइव आल हिमाचल न्यूज़/राम प्रकाश वत्स

2024 लोकसभा चुनावों को लेकर देशभर में तैयारियां तेज हो गई हैं। वहीं अगर हिमाचल प्रदेश की बात की जाए तो ये राज्य चुनावों के दृष्टिकोण से बहुत अहम है। भले ही यहां लोकसभा की 4 सीटें हो लेकिन यहां के वोटर्स के मूड का इतिहास यहां के चुनावों को रोमांचक बनाता है।हिमाचल प्रदेश का विश्लेषण किया जाए तो चुनावों की दृष्टि से ये राज्य बहुत महत्वपूर्ण है।लेकिन यहां के मतदाताओं के रूझान की वजह यहां का इतिहास काफी रोमांचक रहता है। राजनीतिक दल अंतिम समय तक मतदाताओं की नब्ज समझ नहीं पाते। वैसे तो हिमाचल प्रदेश में केवल 4 लोकसभा की सीटें हैं लेकिन कशमकश इसे रोमांचक बना देती है।

लोकसभा 2024 के चुनावों की हाहट ने हिमाचल प्रदेश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भाजपा को हिमाचल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर करिश्मे की आस है। भाजपा को यह उम्मीद है कि पिछले दो आम चुनाव में जिस तरह मोदी फैक्टर ने काम किया, ठीक वैसे ही इस बार भी करेगा। भाजपा मोदी की नीतियों और योजनाओं को गिनाते हुए फील्ड में उतर चुकी है। हिमाचल प्रदेश में चार लोकसभा सीटों में वर्तमान में एक पर कांग्रेस व तीन पर भाजपा के कब्जे में है। कांगड़ा चंबा-संसदीय क्षेत्रों में भाजपा व कांग्रेस के मध्य मुकाबला रोचक व तनाव पूर्ण होगा।

भाजपा के लिए इन संसदीय क्षेत्र में जीत पाना आसान नहीं होगा। देखना यह है कि भाजपा अपने पुराने प्रत्याशी पर दांव खेलती है या फिर नया प्रत्याशी उतारती है। वर्तमान समीकरणों को देखे तो कांगड संसदीय सीटों में मुकाबला टक्कर का होगा। लोगों का रुझान अभी तक सन्तुलित नहीं है। खुल कर अपना पक्ष नहीं रख रहे हैं। हिमाचल के शीर्ष राजनीतिक नेताओं की सांसे अटकी हुई है।

धर्मशाला से कांग्रेस के अयोग्य घोषित विधायक सुधीर शर्मा की बगावत के उपरांत कांग्रेस के लिए शुभ संकेत नही है। सुधीर शर्मा कांगड़ा से कांग्रेस के लिए सिरदर्द बन सकते हैं। कांगड़ा-चंबा संसदीय सीट से पिछले नौ चुनावों में सात बार भाजपा जीती है। दो में कांग्रेस जीती है।गत तीन चुनाव भाजपा ने लगातार जीते हैं। भाजपा व कांग्रेस कांगड़ा चंवा संसदीय क्षेत्र से किसे चुनावी दंगल में उतारती है उसके उपरांत पता चलेगा की जनता किस को अपने सर माथे र बैठाती है। 

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