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मेरी-मेरी का त्याग करके भगवान का जाप करें ताकि भवसागर से नैया पार लग सके⇒शास्त्री साई दास न

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मेरी-मेरी का त्याग करके भगवान का जाप करें ताकि भवसागर से नैया पार लग सकेशास्त्री साई दास न

लाइव आल हिमाचल न्यूज़, जवाली, डा़. नवनीत कुमार शर्मा

भगवान् श्रीहरि का सृष्टि के कण-कण में वास है तथा कण-कण में विराजमान श्री हरि के दर्शन करवाने वाले चक्षु हमारे पास नहीं हैं। यह प्रवचन खरोटा में आयोजित श्रीमद भागवत कथा में कथावाचक शास्त्री साईं दास ने कही। कथावाचक शास्त्री साईं दास ने कहा कि भगवान हरि के दर्शन करवाने का मार्ग संतों की संगत में जाने से मिलता है। उन्होंने कहा कि हमें संगत में जाकर भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए तथा संगत में जाने से हम पापों से मुक्त हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि मानव योनि सब योनियों से श्रेष्ठ है तथा 84लाख योनियों को भोगने उपरांत मानव योनि मिलती है। उन्होंने कहा कि इंसान को ध्यान रखना चाहिए वह इस दुनिया में अकेला नग्न अवस्था में आया है तथा अकेले ही नग्न अवस्था में संसार को त्याग कर चले जाना है। उन्होंने कहा कि मैं-मेरी का त्याग करके भगवान का जाप करें ताकि भवसागर से नैया पार लग सके। शास्त्री साई दास ने कहा कि इस मोहमाया रूपी संसार में कोई किसी का नहीं है।

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