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चुनाव के समय तर्जनी के नाखून और छल्ली पर अमिट चुनावी(इंक) स्याही(Indelible Election Ink) लगाने का महात्व, नियम,कब शुरू हुआ जानिए और पढि़ए…? 

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चुनाव के समय तर्जनी के नाखून और छल्ली पर अमिट चुनावी(इंक) स्याही(Indelible Election Ink) लगाने का महात्व, नियम,कब शुरू हुआ जानिए और पढि़ए…? 

आप जानते हैं कि आंगुली पर लगी इस इंक के निशान की कीमत क्या है चौंक जाओगे…?

जानिए अमिट चुनावी इंक के बारे में

लाइव आल हिमाचल न्यूज़ संपादक राम प्रकाश वत्स

भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है भारत के लोकतंत्र की अपनी अनूठी पहचान है।भारत दुनिया की सबसे बड़ी मतदाता सूची में से एक है, जहां कई स्तरों पर चुनाव होते हैं। इसलिए, चुनाव इंक का उपयोग बड़ी मात्रा में और बहुत बार किया जाता है।इसकी अपनी विशेषता है मत डालने से पूर्व मतदाता की अंगुली पर इंक लगाई जाती है यह इंक दो प्रकार की होती है काली और नीली आज इस पर हम चर्चा करेंगे।

लोकतंत्र की खूबसूरती के साथ पुनः मतदान ना कर सके मतदाता इसलिए तर्जनी के नाखून और छल्ली पर..….. 

तर्जनी के नाखून और छल्ली् एक उंगली पर चुनावी इंक का निशान भारत में लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक है। मतदान के समय पुनः मतदाता मतदान ना कर सके को रोकने के लिए भारत और विदेशों में चुनावों के दौरान अमिट चुनाव इंक का उपयोग किया जाता है। आमतौर पर, इसका उपयोग बायीं तर्जनी के नाखून और छल्ली पर किया जाता है। अगर आपने कभी वोट डाला है तो आपको पता होगा कि वोट डालने के दौरान चुनाव आयोग की ओर से बूथ पर तैनात अधिकारी प्रत्येक वोटर की उंगली में एक इंक लगाते हैं।ये इंक इस बात का इशारा होती है कि आप वोट डाल चुके हैं।इस इंक का निशान काफी दिनों तक उंगली पर बना रहता है इस इंक को कम से कम 72 घंटे तक मिटाया नहीं जा सकता है और इसका रंग 15 दिनों तक लगा रहता है।

जानिए अमिट चुनावी इंक के बारे में

केवल चुनाव प्रक्रिया में उपयोग होती है एक ही कंपनी तैयार करती है इस स्याही को रंग की इस इंक को भारतीय चुनाव प्रक्रिया में वर्ष 1962 में शामिल किया गया। दरअसल, यह इंक कर्नाटक के मैसूर में मैसूर पेंट एंड वार्निश लिमिटेड नाम की कंपनी तैयार करती है। इस कंपनी की स्थापना 1937 में की गई थी।मुख्य चुनाव आयुक्त सुकुमार सेन ने इस इंक को निर्वाचन प्रक्रिया में शामिल कराया। अब कंपनी इलेक्शन इंक या इंडेलिबल इंक के नाम से इंक बनाती है। कंपनी चुनावी इंक को सिर्फ सरकार और उससे जुड़ी एजेंसियों को ही सप्लाई करती है।

सावधानी बरतना अवश्यक है।

अमिट इंक के उपयोग से जलने का जोखिम मौजूद है। हालाँकि, चिकित्सा साहित्य इसके बारे में चुप है। इस अनुभव के साथ, हम अनुशंसा करते हैं कि चुनाव पूर्व प्रशिक्षण के दौरान चुनाव ड्यूटी अधिकारियों को रासायनिक जलने के जोखिम के बारे में समझाया जाना चाहिए, ताकि इंक के सीधे संपर्क से बचा जा सके। उंगलियों पर दाग लगने से बचाने के लिए एप्लिकेटर लंबा होना चाहिए और चुनाव अधिकारियों को नियमित अभ्यास के रूप में सुरक्षात्मक दस्ताने का उपयोग करना चाहिए।

नियम क्या है इंक लगाने का

यदि वोटर्स का दोनों हाथ ही नहीं है तो इस स्थित में उसके पैर के अंगूठे पर इंक से निशान लगाया जाता है।

यदि मतदाता के दोनों हाथों में कोई उंगली नहीं है तो ऐसे में उसके हाथ के किसी भी एक हिस्से पर स्याही लगाई जाती है।

आप जानते हैं कि आंगुली पर लगी इस इंक के निशान की कीमत क्या है चौंक जाओगे…?

हाथ की आंगुली पर लगी इस इंक के निशान की कीमत 12 रुपये 70 पैसे है। इस इंक की कीमत 12700 रुपये लीटर है और एक अंगुली पर एक मिलीलीटर इंक लगती है यानी हर मतदाता की अंगुली पर 12.70 रुपये की इंक लगाई जाती है

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