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विश्व पृथ्वी दिवस 22 अप्रैल 2024 : आज विश्व पृथ्वी दिवस पर सभी विश्व नागरिकों को हार्दिक बधाई एवम शुभकामनाएं:

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विश्व पृथ्वी दिवस 22 अप्रैल 2024 : आज विश्व पृथ्वी दिवस पर सभी विश्व नागरिकों को हार्दिक बधाई एवम शुभकामनाएं

पर्यावरण हितैषी Dr अशोक कुमार सोमल

इस पूरे ब्रह्मांड में अभी तक की वैज्ञानिक खोज में यह सिद्ध हुआ है कि केवल धरती पर ही जीवन है और जीवन का कारण धरती का विशेष पर्यावरणीय संयोग है! धरती पर जल है वायु है तापमान है मिट्टी है और आकाश है! इसे विशेष प्रस्तिथि कहा जाता है! और जीवन भी करोड़ों वर्षों के विकास की स्तिथियों से गुजरते हुए अब तक के मुकाम तक पहुंचा है! सभी जीवों में मनुष्य श्रेष्ठ है और मनुष्य ने खुद की सुख सुविधा के लिए धरती के संसाधनों का दोहन करना शुरू किया है! आज से लगभग डेढ़ सौ वर्ष पूर्व उद्योगिकरण की शुरुआत हुई और मनुष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए मशीनी युग की शुरुआत हुई! फिर इसके लिए ईंधन की जरूरत पड़ी और फिर धीरे नए नए अविष्कार हुए और धरती के संसाधनों का बड़ी तेजी से दोहन शुरू हुआ! जनसंख्या भी बढ़ने लगी और भोजन के साथ दूसरी जरूरतें कपड़ा मकान इत्यादि की मांग बढ़ी! इसके लिए भूमि की जरूरत पड़ी ! जंगल कटने लगे! खेती के लिए जंगलों का सफाया किया! शहर बसे और शहरों की जरूरतों के लिए धरती पर संसाधनों के दोहन का दबाव बढ़ा! एक तरफ उद्योगों का प्रदूषण बढ़ा तो दूसरी तरफ आने जाने के साधनों का विस्तार हुआ! देखते देखते ही इतनी प्रगति हुई कि धरती का तापमान बढ़ना शुरू हुआ और यह सिलसिला बढ़ता ही गया! धरती के बढ़ते तापमान से मौसम पर विपरीत असर पड़ने लगा है! अब स्तिथि ने भयंकर रूप धारण कर लिया है! वैज्ञानिकों का मानना है कि उद्योगिकरण से पहले जितना धरती का औसतन सामान्य तापमान था उससे डेढ़ डिग्री सेल्सियस तापमान यदि बढ़ जाएगा जो कि लगभग उस सीमा तक पहुंचने वाला है तो फिर इसे रिवर्स करना मुश्किल होगा! यानी फिर इसे पहले वाली स्तिथि में किसी भी हालात में नहीं लाया जा सकता है! फिर धरती पर मौसम जीवन के अनुकूल नहीं रहेगा! कहीं सुखा पड़ेगा कहीं तूफानों और ज्यादा वर्षा की स्तिथि बनेगी! धरती पर से बर्फ पिघलेगी! समुद्र का जल स्तर बढ़ेगा! मनुष्य का जीवन संकट में पड़ेगा!
विश्व के बुद्धिजीवियों वैज्ञानिकों और शासनाध्यक्षों ने विभिन्न संधियों से धरती के तापमान को नियंत्रण करने के लिए कार्यक्रम बनाए हैं पर राजनीतिक कारणों की वजह से इस पर पूरा अमल नहीं हो पा रहा है! ज्यादातर नुकसान युद्ध के लिए तैयार किए जा रहे हथियारों की दौड़ के साथ जीवन की विलासिता की सामग्रियों के साथ रहीशी जीवन शैली से धरती के पर्यावरण पर विपरीत असर पड़ रहा है! युद्धों से भी पर्यावरण को बहुत नुकसान हो रहा है जैसे रूस यूक्रेन फिलिस्तीन इजरायल युद्ध से यहां पर्यावरण पर विपरीत असर पड़ रहा है वहीं युद्ध की वजह से विश्व की अर्थव्यवस्था पर भी विपरीत असर पढ़ना लाजमी है!
अतः जितना जल्दी मनुष्य समझे उतना ही इस समस्या को हल किया जा सकता है! इसके लिए विश्व के हर नागरिक को जागरूक हो कर पर्यावरण संरक्षण के लिए लामबंद हो कर हर प्रयास किया जाना है! तभी पर्यावरण को सारंक्षित किया जा सकेगा!
आओ सभी मिलकर आवाज उठाएं और साथ में खुद कायोगदान भी दें!2024 साल पर्यावरण सरंक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है इसलिए लोकसभा चुनाव में अपना मत केवल पर्यावरण सरंक्षण के लिए ही करें!

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