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प्राथमिक शिक्षा खंड राजा का तालाब के अंतर्गत आते राजकीय प्राथमिक स्कूल पंजरोड़ में मात्र एक अध्यापिका के सिर पर बच्चों को शिक्षा देने का जिम्मा सौंपा गया है।

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 जिला कांगड़ा संवाददाता विजय समयाल

प्राथमिक शिक्षा खंड राजा का तालाब के अंतर्गत आते राजकीय प्राथमिक स्कूल पंजरोड़ में मात्र एक अध्यापिका के सिर पर बच्चों को शिक्षा देने का जिम्मा सौंपा गया है। खंड राजा का तालाब के 80 स्कूलों में से बच्चों की संख्या के हिसाब 15 वें स्थान पर चल रहे उक्त स्कूल में कुल 42 बच्चे अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा ग्रहण करते हैं।आस पास के लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर के गरीब अभिभावकों ने अपने बच्चों को इस उद्देश्य से यहां दाखिल करवाया था। ताकि उनके बच्चे भी शिक्षा के मामले में प्राइवेट अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों के विद्यार्थियों के साथ मुकाबला कर सकें।अभिभावकों की मानें तो राजकीय प्राथमिक स्कूल पंजरोड़ में अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा प्रारंभ करने में अध्यापक ब्रजेश कौशल व अध्यापिका सुनीता कुमारी का विशेष योगदान रहा हैं। दोनों अध्यापकों ने सामूहिक प्रयास से स्कूल में अच्छी शिक्षा व सौहार्दपूर्ण वातावरण पैदा करके स्कूल को अग्रणी श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया है।जबकि स्वच्छता के मामले में यहां विशेष ध्यान दिया जाता है। परंतु लगभग छ: माह पहले अध्यापक ब्रजेश कौशल की पदोन्नति होने से उन्हें अन्यत्र जाना पड़ा। जिससे 42 बच्चों को शिक्षा देने की जिम्मेवारी यहां पर तैनात केवल मात्र एक अध्यापिका सुनीता कुमारी पर आ गई है। छ: माह बीत जाने के उपरांत भी यहां पर रिक्त चल रहे पद पर किसी अध्यापक की तैनाती नहीं हो पाई है।जिससे अभिभावक वर्ग में काफी रोष है।

एसएमसी प्रधान सुदेश कुमारी अभिभावक वर्ग विक्रम सिंह, सुशील, अमित, अनिल कुमार, छोटू राम, रेणु बाला, सरला देवी, अल्पना देवी व राधिका देवी का कहना है कि उन्होंने अपने बच्चों को उक्त स्कूल में इसलिए डाला था। ताकि बच्चों को अंग्रेजी माध्यम में बेहतरीन शिक्षा हासिल हो सके।दोनों अध्यापकों ने स्कूल में शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ी । परंतु अध्यापक ब्रजेश कौशल की पदोन्नति होने पर अन्य जगह चले जाने से उनकी सीट अभी तक खाली चल रही है।अभिभावकों का कहना है कि

एक अध्यापिका के सिर पर 42 बच्चों को शिक्षा प्रदान करना कहीं भी उचित नजर नहीं आता। इनका कहना कि शीघ्र ही यहां दूसरे अध्यापक की तैनाती यहां नहीं होती है। तो उन्हे मजबूरन स्कूल पर ताला जड़ना पड़ेगा।वहीं अपने बच्चों को अन्य स्कूलों में दाखिल करवाना पड़ेगा।स्थानीय बीडीसी सदस्य तमन्ना धीमान का कहना है कि

पंजरोड़ स्कूल के दोनो अध्यापकों ने सामूहिक प्रयास से यहां अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा देने की बेहतरीन शुरुआत की है।बेहतरीन शिक्षा मिलने की आस में अभिभावकों ने यहां अपने बच्चों को दाखिल करवाया।परंतु दुःख का विषय है कि यहां छ: माह से एक अध्यापक का पद खाली चल रहा है।

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