नमस्कार 🙏 हमारे न्यूज पोर्टल - मे आपका स्वागत हैं ,यहाँ आपको हमेशा ताजा खबरों से रूबरू कराया जाएगा , खबर ओर विज्ञापन के लिए संपर्क करे +91 8894723376 ,हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें, साथ मे हमारे फेसबुक को लाइक जरूर करें , हिन्दूंओ के मंदिरों में दर्शन के लिए अमीरों या गरीवों का भेदभाव क्यों ? कंहा तक तर्कसगंत है और ? – लाइव ऑल हिमाचल न्यूज

हिन्दूंओ के मंदिरों में दर्शन के लिए अमीरों या गरीवों का भेदभाव क्यों ? कंहा तक तर्कसगंत है और ?

😊 कृपया इस न्यूज को शेयर करें😊

हिन्दूंओ के मंदिरों में दर्शन के लिए अमीरों या गरीवों का भेदभाव क्यों ? कंहा तक तर्कसगंत है और ? 

1 माता चिंतपूर्णी में (जबकि चौथी कैटेगरी में मंत्री, विधायकों और सांसदों के वीआईपी लिए दर्शन करना निशुल्क होगा.) राजनीतिको को क्यों माफ कर दिया गरीब भक्त का क्या कसूर है ? 

2 क्या किसी भी धार्मिक स्थल का अमिर होना उस देवी देवता के श्रदालुओं के लिए अभिशाप है? 

3 गौरतलव है कि भारत के अन्य धर्मो में भी अमीर धर्म स्थान है यहाँ हिन्दुओं के धर्म स्थलों से हजार गुणा चढावा चढवा है वंहा क्यों नहीं लगाते दर्शन शुल्क हिन्दू मंदिरों ?

4.क्या देवी देवता भी अपने ( वीआईपी श्रद्धालुओं को 1100 रुपए की पर्ची कटानी होगी, जिसमें 5 श्रद्धालु माता के दरबार में हाजिरी भर सकेंगे. इसके अलावा दूसरी कैटेगरी में 65 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों को एक अटेंडेंट के साथ 50 रुपये देने होंगे. उधर, तीसरी कैटेगरी में दिव्यांगों को एक अटेंडेंट के साथ 50 रुपये देने होंगे,) श्रदालुओंं को उनकी अमीरी या गरीबी के आधार पर कृपा करेंगे देवी देवता क्यों ? 

मेरे विचार में इस प्रकार का मंदिर में गरीबों अमीरों का नापतोल करना हिन्दूओ के संस्कृति के के विपरीत है. देवी देवता कभी भी अपने भगतों के साथ भेद नहीं करते एवं अमीरो- गरीबों  हर प्राणी पर एक समान दृष्टि रखते हैं जो श्रद्धा से आस्था रखता है उसी के वश में हो जाता है. भगवान के दरवार में आमदन बढाने के लिए यह कैसा शुल्क यही कारण है की लोगों की आस्था कम हो रही है. अभी  तक जातपात ने काफी हदतक हिन्दू धर्म को नुकसान पंहुचाया है और अब  यह दरशन शुल्क   

मंदिर प्रशासन यह स्पष्ट करे की अमीर गरीब की के नाप तौल का पैमाना क्या होगा. यह कैसे निधारित करेंगे की कौन अमीर  है और कौन गरीब है इसके लिए कम से कम अमीरों के लिए सवा लाख रूपये दक्षिणा होनी चाहिए. तब अमीर और गरीब के अंतर का बोध हो.

विशेष :-आप अपने विचार रखे की देवी देवताओं के दरबार में दर्शन शुल्क लगना उचित है की अनुचित#मेरा सभी से अग्राह है की अपने विचार रखे ताकि इस नई नवेली प्रथा का सही मार्गदर्शन हो.

Whatsapp बटन दबा कर इस न्यूज को शेयर जरूर करें 

Advertising Space


[responsivevoice_button voice="Hindi Male"]