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पर्यावरण संरक्षण:  उस तरह अवश्क है जिस प्रकार शरीर में खून,जंगल जमीन जीवन का आधार जल  है इसका मोल हर नागरिक समझे!

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     पर्यावरण संरक्षण ही धरती का आधार है हरेक का बाजूद धरती से हैं। परिणाम सामने हैपर्यावरण प्रेमी अशोक कुमार सोमल पीएचडी रि. डीएफओ

1 जल मिट्टी जंगल सरंक्षण साथ में शिक्षा रोजगार स्वास्थ्य सुरक्षा: 

2जंगल जमीन जीवन का आधार जल  है इसका मोल हर नागरिक समझे!

3 पानी पीने के काबिल नहीं रहा

4 जंगलों का दोहन जलाने की लकड़ी और इमारती लकड़ी की आपूर्ति करने के लिए हुआ

5 धरती का बढ़ता तापमान यानी बदलते मौसम का मुख्य कारण बतावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बहुत बढ़ गई है और इसकी मुख्य वजह हमारा उद्योगीकरण के साथ मानवीय जीवन शैली है जो ज्यादा सुविधाओं के लिए धरती पर पर्यावरण अंसतुलन बना रहा है! मानवीय भूख इतनी बढ़ गई है कि अब धरती के सारे संसाधनों को जल्दी ही खत्म करने की होड़ लगी है!

6 ग्लेशियर जो हिमालय से निकलने वाली नदियों के लगातार बहते जल का स्त्रोत हैं खत्म होने के कगार पर हैं! यदि समय रहते इस के लिए नीति नहीं बनाई और इसपर गंभीर काम नहीं हुआ तो शीघ्र देश बहुत बड़े संकट का सामना करेगा!

 

                      दुनियां में आज की सबसे बड़ी समस्या धरती का बढ़ता तापमान है! प्रदूषण दूसरी बड़ी समस्या है और भारत के बड़े शहर आज साफ जल और वायु के लिए संघर्ष पर्यावरण संरक्षण ही धरती का आधार है हरेक का बाजूद धरती से हैं।कर रहे हैं दिल्ली में और दिल्ली के आस पास जल पीने काबिल नहीं है और हवा सांस लेने काबिल नहीं है! दिल्ली वासियों को साफ पानी मुहैया करवाना एक बहुत बड़ी चुनौती है!

आधा भारत आज पीने के पानी और सिंचाई के लिए पानी की व्यवस्था से जूझ रहा है! भारत में वर्षा लगभग सभी जगहों में पर्याप्त है! लेकिन वर्षा का पैटर्न ऐसा है कि ज्यादातर वर्षा बरसात के कुछ महीनों या कहें चंद दिनों तक ही सीमित है 

इसलिए एक तरफ जल सरंक्षण भारत की नीति होनी है और दूसरी तरफ इसका सही नियोजन जरूरी है! स्वतंत्र भारत में शुरू से ही नदियों पर बांध बनाए और एक तरफ जल भंडार किया दूसरी तरफ बाढ़ नियंत्र की साथ में नहरों का जाल बिछाया और बिजली तैयार कर देश रोशन किया! 

 

                       20 वीं सदी में जंगलों का दोहन जलाने की लकड़ी और इमारती लकड़ी की आपूर्ति करने के लिए हुआ क्योंकि इसका कोई विकल्प उपलब्ध नहीं था! फिर भी जंगलों का रख रखाव बढ़िया था यह सरकारी नीति का एक अहम हिस्सा रहा!

जंगल मिट्टी जल सरंक्षण का बहुत बढ़िया जरिया हैं और कहा जाता है और यह वैज्ञानिक आधार है कि मैदानी इलाकों में एक तिहाई और पहाड़ी इलाकों में दो तिहाई जंगल होने चाहिए और जंगल ऐसे हों जो सही मायने में आर्थिक रूप में और पर्यावरण संरक्षण करने में पूरी तरह सक्षम हों यानी प्रबंध वैज्ञानिक हो!

जिस तरह से आज जंगलों पर अंधाधुंध कुप्रबंध का दबाव बना है इससे भारत में आने वाले शीघ्र समय में बहुत बड़ा जल संकट का सामना करना पड़ेगा! हमारे जितने भी नदियों पर बांध बने हैं इनके जल भंडार की क्षमता लगभग खत्म हो चुकी है ऊपरी क्षेत्रों में जल सरंक्षण भी लगभग खत्म होता जा रहा है हमारे ग्लेशियर जो हिमालय से निकलने वाली नदियों के लगातार बहते जल का स्त्रोत हैं खत्म होने के कगार पर हैं! यदि समय रहते इस के लिए नीति नहीं बनाई और इसपर गंभीर काम नहीं हुआ तो शीघ्र देश बहुत बड़े संकट का सामना करेगा!

                  हिमाचल के साथ जितने भी हिमालय में प्रदेश हैं और देश के दूसरे पहाड़ी क्षेत्र हैं उन्हें पर्यावरण सरंक्षण जोन डिक्लेयर कर वहां के जंगलों के विशेष प्रबंध करने होंगे! जो

जल जंगल जमीन जीवन का आधार है इसका मोल हर नागरिक समझे

 

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