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पितृ पक्ष कब से कब तक है जानिए**पितरों के देवता का क्या नाम है** पितृ  पक्ष में जन्मे बच्चे क्या हम श्राद्ध में जन्मदिन मना सकते हैं? जानिए पितृ कैसे होते हैं* जानिए पितरों व श्राद्धों से जुड़ी हर जानकारी

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2023 बरस में अधिकमास की वजह से पितर पक्ष का आरंभ 15 दिन देरी से हो रहा है। कुछ लोग भाद्रपद की पूर्णिमा से मानते हैं और इसे पूर्णिमा श्राद्ध के रूप में मनाते हैं। वहीं कुछ लोग आश्विन मास की प्रतिपदा से पितर पक्ष मानते हैं। पितर पक्ष का आरंभ 29 सितंबर शुक्रवार से हो रहा है और आखिरी श्राद्ध यानी कि सर्वपितृ अमावस्‍या 14 अक्‍टूबर को है

         पितरों के देवता का क्या नाम है?

अर्यमा पितरों के देव हैं। ये महर्षि कश्यप की पत्नी देवमाता अदिति के पुत्र हैं और इंद्रादि देवताओं के भाई। पुराण अनुसार उत्तरा-फाल्गुनी नक्षत्र इनका निवास लोक है। इनकी गणना नित्य पितरों में की जाती है जड़-चेतन मयी सृष्टि में, शरीर का निर्माण नित्य पितृ ही करते हैं

        पितृ  पक्ष में जन्मे बच्चे कैसे होते हैं?

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक पितृ पक्ष में बच्चे का जन्म होना बहुत शुभ होता है. यह बच्चे बेहद रचनात्मक होते हैं और अपनी कला के जरिए खूब मान-सम्मान कमाते हैं. श्राद्ध पक्ष में जन्‍मे बच्चों पर पितरों का विशेष आशीर्वाद रहता है और वो अपने जीवन में खूब तरक्‍की करते हैं.

       क्या हम श्राद्ध में जन्मदिन मना सकते हैं?

श्राद्ध काल में नए कपड़े न खरीदें और न ही पहनें। इस पखवाड़े के दौरान नये घर में प्रवेश न करें, नया व्यवसाय या नया उद्यम शुरू न करें या
         बेटी पिता का श्राद्धक्या कर सकती है?

अगर किसी व्यक्ति के पुत्र नहीं हैं, तो ऐसे में परिवार की महिलाएं यानी पुत्री, पत्नी और बहू अपने पिता के श्राद्ध और पिंड का दान कर सकती हैं। गरुड़ पुराण की मान्यता के अनुसार अगर कोई पुत्री सच्चे मन से अपने पिता का श्राद्ध करती है तो पुत्र के न होने पर भी पिता उसे स्वीकार कर आशीर्वाद देता है।

        क्या दामाद श्राद्ध कर सकते हैं?

यदि व्यक्ति के भाई-बहन और बेटियाँ हैं, तो उसके पुरुष भाई-बहनों को प्राथमिकता दी जाती है। भाई-बहनों की अनुपस्थिति में उनके दामाद प्रदर्शन कर सकते हैं । ऐसे में अंतिम संस्कार करने वाले व्यक्ति को वार्षिक श्राद्ध करना आवश्यक होता है।
श्राद्ध कितनी पीढ़ी तक किया जाता है?

       श्राद्ध कर्म तीन पीढ़ियों का ही होता है।

इसमें मातृकुल और पितृकुल (नाना और दादा) दोनों शामिल होते हैं। तीन पीढ़ियों से अधिक का श्राद्ध कर्म नहीं होता है।

         श्राद्ध में क्या नहीं खिलाना चाहिए?

पितृ पक्ष में मांस, मदिरा, अंडा, शराब बीड़ी, सिगरेट आदि का सेवन नहीं करना चाहिए. पितृ पक्ष के दौरान चना या फिर चने से बनी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए. पितृ पक्ष में पितरों को भी श्राद्ध में चने की दाल, चने और चने से बना सत्तू आदि का उपयोग अशुभ माना जाता है.

          16 श्राद्ध में क्या नहीं करना चाहिए?

श्राद्ध के जो 16 दिन होते है उनमें मांगलिक कार्य जैसे विवाह ,मुंडन ,उपनयन संस्कार ,नींव पूजन गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य नहीं किये जाते है. मान्यता ये भी है की श्राद्ध पक्ष में अगर कोई शुभ कार्य किया जाता है तो उस काम का कोई फल नहीं मिलता है

            पितृ के दोष के लक्षण

अगर मिलता भी है तो कई बार संतान विकलांग होती है, मंदबुद्धि होती है या फिर चरित्रहीन होती है या फिर कई बार बच्‍चे की पैदा होते ही मृत्‍यु हो जाती है। नौकरी और व्‍यवसाय में मेहनत करने के बावजूद भी हानि होती रहे। परिवार में अक्‍सर कलह बने रहना या फिर एकता न होना। परिवार में शांति का अभाव।

        पीपल के पेड़ पर जलाएं दीपक

ऐसा माना जाता है कि पीपल के पेड़ पर देवी-देवताओं के अलावा पितरों का भी वास होता है. ऐसे में यदि कोई व्यक्ति पीपल में जल देकर रोजाना घी का दीपक पीपल के नीचे जलाए तो पितृ प्रसन्न होते हैं और ऐसे व्यक्तियों को पितृ दोष से भी मुक्ति मिलती है.

              पितरों के लिए कौन सा मंत्र है

                  पितृ दोष निवारण मंत्र

‘ॐ श्री सर्व पितृ देवताभ्यो नमो नमः’, ॐ प्रथम पितृ नारायणाय नमः, ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ये सभी मंत्र आपको पितृ दोष से मुक्ति दिलाने में मदद करते हैं और यदि आप इन मंत्रों का जाप विधि-विधान से करते हैं तो पितरों को मुक्ति मिलती है और उनका आशीर्वाद मिलता है।

     श्राद्ध कितनी पीढ़ी तक किया जाता है?

श्राद्ध कर्म तीन पीढ़ियों का ही होता है। इसमें मातृकुल और पितृकुल (नाना और दादा) दोनों शामिल होते हैं। तीन पीढ़ियों से अधिक का श्राद्ध कर्म नहीं होता है।

        पितर पक्ष की सभी तिथियां

29 सितंबर 2023, शुक्रवार: पूर्णिमा और प्रतिपदा श्राद्ध

30 सितंबर 2023, शनिवार: द्वितीया श्राद्ध

1 अक्टूबर 2023, रविवार: तृतीया श्राद्ध

2 अक्टूबर 2023, सोमवार: चतुर्थी श्राद्ध

3 अक्टूबर 2023, मंगलवार: पंचमी श्राद्ध

4 अक्टूबर 2023, बुधवार: षष्ठी श्राद्ध

5 अक्टूबर 2023, गुरुवार: सप्तमी श्राद्ध

6 अक्टूबर 2023, शुक्

7 अक्तूबर 2023, शनिवार: नवमी श्राद्ध

8 अक्टूबर 2023, रविवार: दशमी श्राद्ध
9 अक्टूबर 2023, सोमवार: एकादशी श्राद्ध

11 अक्टूबर 2023, बुधवार: द्वादशी श्राद्ध
12 अक्टूबर 2023, गुरुवार: त्रयोदशी श्राद्ध

13 अक्टूबर 2023, शुक्रवार: चतुर्दशी श्राद्ध

14 अक्टूबर 2023, शनिवार: सर्व पितृ अमावस्या

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