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अयोध्या के कमिश्नर गौरव दयाल ने लिया पूज्य माताजी का आशीर्वाद |अहिंसा से ही पर्यावरण की शुद्धि हो सकती है-गणिनी ज्ञानमती 

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अयोध्या के कमिश्नर गौरव दयाल ने लिया पूज्य माताजी का आशीर्वाद |अहिंसा से ही पर्यावरण की शुद्धि हो सकती है-गणिनी ज्ञानमती

जिला संवाददाता अनुज कुमार जैन:    अवध प्रान्त के अयोध्या श्री दिगम्बर जैन मंदिर, रायगंज में चल रहे दशलक्षण महापर्व के चतुर्थ दिवस उत्तम सत्य धर्म का दिवस है। गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने बकाया है कि सत्य बोलने वाले मानव को वाक्य सिद्धि हो जाती है,

वह जो भी बोलता है, वह कार्य सिद्धि हो जाता है। उत्तम सत्य धर्म सर्वोपरि है। भारतीय मुद्रा पर भी सत्यमेव जयते लिखा रहता है। चाहे उसे प्राप्त करने के लिए कितना भी झूठ बोलना पड़े, लेकिन सत्य की ही विजय होती है।

इस अवसर पर अयोध्या (फेजाबाद) मण्डल के कमिश्नर गौरव दयाल जी ने जैन मंदिर एवं पूज्य माताजी के दर्शन किए

माननीय कमिश्नर साहब का जैन मंदिर में कमेटी की ओर से स्वागत किया गया, जिसमें उन्हें माल्यार्पण, अंग वस्त्र, शॉल पहनाकर कमेटी के अध्यक्ष-कर्मयोगी पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामीजी, कार्याध्यक्ष अनिल कुमार जैन-दिल्ली, मंत्री विजय कुमार जी, डॉ. जीवन प्रकाश जैन, विधान के सौधर्म इन्द्र आदीश जैन सर्राफ-लखनऊ ने किया। पूज्य प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती माताजी ने कमिश्नर साहब को साहित्य भेंट किया। पूज्य माताजी ने जम्बूद्वीप का प्रतीक चिन्ह प्रदान किया एवं इस अवसर पर माताजी ने उन्हें आशीर्वाद देते हुए कहा कि पर्यावरण की शुद्धि अहिंसा से हो सकती है, अयोध्या भगवान ऋषभदेव एवं भगवान राम की भूमि है, जहाँ से अहिंसा का शंखनाद हुआ। इस अवसर पर माननीय श्री कमिश्नर साहब ने कहा कि संस्कृतियों का संगम है अयोध्या तीर्थ। यहाँ पर जैन एवं सनातन संस्कृति के महापुरुषों ने जन्म लिया एवं इस तीर्थ पर रहकर संचालन किया। ऐसे स्थान पर मुझे आने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। मैं अभिभूत हूँ एवं मैं अवश्य ही तीर्थ की प्रगति में शासन-प्रशासन से जो भी हो सकेगा, उसे शीघ्र ही करूँगा।

संध्याकालीन सभा में सरस्वती पूजन एवं तत्त्वार्थसूत्र का वाचन किया गया तथा रात्रिकालीन सभा में तीस चौबीसी मण्डल विधान की आरती एवं भक्ति की गई। पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी की आरती की गई। साथ में सांस्कृतिक कार्यक्रम में सौधर्म इन्द्र की सुधर्मा सभा का भव्य मंचन किया गया, जिसमें सौधर्म इन्द्र का पद अमृत जैन ध.प. श्रीमती शिखा जैन ने प्राप्त किया।

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