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सीएम सुक्खू बोले- पुलिस विभाग में 1200 कांस्टेबल और महिला सब इंस्पेक्टर की होगी

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मुख्यमंत्री श्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक बैठक में उन्होंने कहा कि बदलती तकनीक के साथ-साथ अपराध के तौर-तरीकों में भी बदलाव आया है।

शिमला:  मुख्यमंत्री श्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक बैठक में उन्होंने कहा कि बदलती तकनीक के साथ-साथ अपराध के तौर-तरीकों में भी बदलाव आया है। इसे देखते हुए पुलिस विभाग को अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव लाना आवश्यक है।     सीएम सुक्खू ने कहा कि- पुलिस विभाग में 1200 कांस्टेबल और महिला सब इंस्पेक्टर की होगी भर्तीमुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस विभाग के आधुनिकीकरण के लिए राज्य सरकार पर्याप्त धन उपलब्ध करवाएगी। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में पुलिस विभाग में 1200 से अधिक कांस्टेबल और महिला सब-इंस्पेक्टर की भर्ती की जाएगी।प्रदेश के प्रत्येक थाने में पुलिस कर्मी साइबर क्राइम से निपटने में भी सक्षम होने चाहिए।पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती के लिए रोटेशन नीति बनाने, संवेदनशील पदों पर केवल तीन वर्ष तक ही तैनाती करने और इसके उपरांत अनिवार्य तौर पर उन्हें कूलिंग ऑफ पीरियड देने के निर्देश दिए, ताकि पुलिस के कामकाज में जबावदेही सुनिश्चित की जा सके। मुख्यमंत्री ने शिक्षण संस्थानों के समीप नशीले पदार्थों (ड्रग्स) की समस्या की रोकथाम के लिए विशेष टीमें तैनात करने के निर्देश भी दिए, ताकि बच्चों को नशे जैसी बुराई से बचाया जा सके

कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान कर उनका एक पूल तैयार करने के निर्देश देते हुए कहा कि इससे विभिन्न अभियानों में उनका प्रभावी योगदान सुनिश्चित हो सकेगा। प्रदेश के प्रत्येक थाने में पुलिस कर्मी साइबर क्राइम से निपटने में भी सक्षम होने चाहिए। उन्होंने प्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठों एवं मंदिरों इत्यादि में आयोजित होने वाले मेलों के दौरान बेहतर पुलिस व्यवस्था के लिए पुलिस अधीक्षक के पास आरक्षित बल रखने के भी निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने आबादी, क्षेत्रफल, अपराध दर, पर्यटकों की संख्या सहित अन्य कारकों को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के पुलिस थानों की पुनःसंरचना करने के निर्देश दिए, ताकि वहां स्थानीय जरूरतों व इन कारकों के आधार पर पुलिसकर्मी तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जा सकें। उन्होंने थानों को श्रेणीबद्ध करने और पुलिस चौकियों के स्थान पर केवल पुलिस थाने ही खोलने की संभावनाएं तलाशने के निर्देश भी दिए, ताकि कानून-व्यवस्था को और मजबूत किया जा सके।पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती के लिए रोटेशन नीति बनाने, संवेदनशील पदों पर केवल तीन वर्ष तक ही तैनाती करने और इसके उपरांत अनिवार्य तौर पर उन्हें कूलिंग ऑफ पीरियड देने के निर्देश दिए, ताकि पुलिस के कामकाज में जबावदेही सुनिश्चित की जा सके। मुख्यमंत्री ने शिक्षण संस्थानों के समीप नशीले पदार्थों (ड्रग्स) की समस्या की रोकथाम के लिए विशेष टीमें तैनात करने के निर्देश भी दिए, ताकि बच्चों को नशे जैसी बुराई से बचाया जा सके।

बैठक में मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव भरत खेड़ा, सचिव गृह डॉ. अभिषेक जैन, पुलिस महानिदेशक संजय कुंडू, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (गृह रक्षक) राकेश अग्रवाल, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (सीआईडी) सतवंत अटवाल, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) अभिषेक त्रिवेदी, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (जेल) एपी सिंह उपस्थित थे।

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