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।चीनी मिल का रैन बसेरा गौवंशों के कब्जे में, गन्ना तौल की रफ्तार धीमी,कड़ाके की ठण्ड में किसान 36-36 घण्टे तक वाहनों पर रहने को विवश

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चीनी मिल का रैन बसेरा गौवंशों के कब्जे में, गन्ना तौल की रफ्तार धीमी,कड़ाके की ठण्ड में किसान 36-36 घण्टे तक वाहनों पर रहने को विवश

महमूदाबाद-सीतापुर।रिपोर्ट-अनुज कुमार जैन

स्थानीय दि किसान सहकारी चीनी मिल में किसानों के गन्ना की तौल की रफ्तार काफी धीमे रूप से चालू है, तौल की धीमी रफ्तार के चलते किसान 36-36 घण्टे तक अपनी बारी आने का इंतजार करते है, जबकि इस भयंकर ठण्ड में चीनी मिल के बाहर स्थित रैन बसेरा भी गौवंशों के कब्जे में होने के कारण किसानों को मुहँ चिढा रहा है। हालांकि तौल के लिए आयी कई ट्रैक्टर ट्रालियां बिना नंबर प्लेट की मौजूद पाई गई। आए दिन क्षेत्र में ओवरलोड वाहनों से सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं किन्तु फिर भी गन्नों से लदे ओवरलोड ट्रैक्टर ट्राले बिना नंबर प्लेट के चलाये जा रहे हैं। यातायात नियमों की अनदेखी करने में माहिर ओवरलोड वाहन किसी की जान को भी जोखिम में डाल सकते है। तौल हेतु चीनी मिल मैदान में आये ज्यादातर वाहन बिना नंबर प्लेट के पाए गए। मुश्किल से 10 प्रतिशत वाहनों में नंबर पड़ा हुआ दिखाई दिया।
जबकि तौल की असल स्थिति के बारे में
अपना गन्ना तौल कराने आए एक किसान ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मैं पहाड़पुर निवासी हूँ और मेरे मुताबिक किसानों को तीन तीन दिन तक का इंतजार तौल के लिये करना पड़ रहा है।
मीरनगर निवासी अमर सिंह ने बताया कि वे पिछले 36 घंटों से तौल के लिए वाहनों पर निवासरत है, भीषण ठंड का भी शिकार होना पड़ रहा हैं। उन्होंने बताया कि गंदगीयुक्त शौचालय, और गौवंशों के कब्जे में जर्जर रैन बसेरा हम लोगों की परेशानियों की वजह है। ऐसी कड़ाके की ठंडक में किसान वाकई में संघर्ष कर रहे है लेकिन उनका यह संघर्ष किसी अधिकारी कर्मचारी का अभी तक दिल नही पसीज पाया है। जबकि गन्ना तौल कराने आये किसानों ने मांग की है कि तौल की धीमी रफ्तार को बढ़ाया जाए, और शौचालय व रैन बसेरे में रहने का सुरक्षित उपाय किया जाए, ताकि किसानों को कोई कठिनाई न हो।

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