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मलेरिया रोग क्या है–रोकथाम कैसे करें– डा.. एन के शर्मा से बातचीत

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       स्वास्थ्य आपका डायरी

                   मलेरिया रोग

सौजन्य: लाइव आल हिमाचल न्यूज़ 

 संपादक राम प्रकाश वत्स का डा. एन के शर्मा के साथ बातचीत के अंश

वैधानिक चेतावनी: सबसे पहले चिकित्सक को दिखाऐं चिकित्सक की देखरेख में इलाज करवाऐं। स्थानीय विधियों का पालन: जितना हो सके, स्थानीय स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइनों और सुझावों का पालन करें।

मलेरिया रोग के लक्षण और दवाईयों

(1)  मलेरिया एक प्रकार की परजीवी संचारित बीमारी है जो मोशको द्वारा फैलती है। प्लेसमोडियम परजीवी के कारण होती है, जो मोशको चुब्के के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में पहुंचती है।

(2)   मलेरिया के लक्षण में बुखार, शीत-ज्वर, उल्टियाँ, थकान, और शीघ्र तकलीफ हो सकती हैं। इस बीमारी के लिए कई प्रकार के विषाणु होते हैं, और इनमें प्लेसमोडियम फैलिस्ट्रेटम विषाणु सबसे प्रमुख हैं।

(3)  मलेरिया का इलाज उपयुक्त दवाओं का सेवन करके किया जाता है, और मोशको काटने से बचाव के लिए अच्छी तरह से सुरक्षित होना भी महत्वपूर्ण है।

(4) मलेरिया का इलाज आमतौर पर एंटीमलेरियल दवाओं का सेवन करके किया जाता है। इन दवाओं में कुछ प्रमुख विकासशील देशों में अर्तेमिसिनिन-आधारित कॉम्बिनेशन थेरेपी (ACT) शामिल हैं।

(5)  इलाज की शुरुआत पर महत्वपूर्ण है कि व्यक्ति के लक्षणों और प्रकृति के आधार पर सटीक रूप से ठीक दवा का चयन किया जाए। सामान्यत: मलेरिया के लिए इलाज अस्पताल में किया जाता है, लेकिन कुछ मामलों में घरेलू इलाज भी किया जा सकता है।

(6)  सक्रमित मच्‍छर के काटने के 10-12 दिनो के बाद उस व्‍यक्ति मे मलेरिया रोग के लक्षण प्रकट हो जाते है।

(7)  मलेरिया रोग लिवर, किडनी और फेफड़ों की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर कई दिक्कतें पैदा करता है।

ठीक होने के बाद भी दवाओं की पूरी खुराक पूरी करनी चाहिए,

इलाज के बाद, व्यक्ति को पूरी तरह से ठीक होने के बाद भी दवाओं की पूरी खुराक पूरी करनी चाहिए, ताकि संक्रमण पूरी तरह से खत्म हो सके। इसके अलावा, मोशको काटने से बचाव के उपायों को अपनाना भी महत्वपूर्ण है।

मलेरिया से बचाव के लिए निम्नलिखित सावधानियाँ बरतना महत्वपूर्ण हैं:

(1) मौसमी सावधानियाँ: जब मलेरिया सबसे अधिक फैलती है, उस समय सबसे अधिक सावधानी बरतना चाहिए, जैसे कि मॉनसून के दौरान।

(2)  मोशको से बचाव: मोशको काटने से बचाव के लिए बाध्यता श्रेणी के जल, कुड़ा, और पानी जमा नहीं होने देना चाहिए। मछरों को बचाने के लिए आपको मैश नेट, बेड नेट, और मोशको-रिपेलेंट इस्तेमाल करना चाहिए।

(3)  वैक्सीनेशन: जब तक उपयुक्त वैक्सीनेशन उपलब्ध हो, वायरस के प्रति सुरक्षा के लिए वैक्सीनेशन लाभकारी हो सकती है।

(4) दवाओं का सही इस्तेमाल: यदि आप मलेरिया प्रवृत्ति क्षेत्र में हैं, तो अपने चिकित्सक से सलाह लेकर आपको दवाओं का उपयोग करना चाहिए।

(5)  स्थानीय विधियों का पालन: जितना हो सके, स्थानीय स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइनों और सुझावों का पालन करें।

मलेरिया कितने दिन में ठीक हो जाता है
इसलिए डॉक्टरों का कहना है कि मलेरिया के लक्षण जितनी जल्दी दिखाई दें, इलाज भी उतनी ही जल्दी हो जाना चाहिए। इस बीमारी में जितनी देर होती है, मरीज़ के ठीक होने की उम्मीद भी उतनी ही कम होने लगती है। बेहतर इलाज से असर दो चार दिन में ही दिखने लगता है, हालांकि पूरी तरह से ठीक होने में दो हफ्ते का वक्त तो लगता ही हम लेरिया से बचाव के लिए निम्नलिखित सावधानियाँ बरतना महत्वपूर्ण हैं:

मौसमी सावधानियाँ: जब मलेरिया सबसे अधिक फैलती है, उस समय सबसे अधिक सावधानी बरतना चाहिए, जैसे कि मॉनसून के दौरान।

मोशको से बचाव: मोशको काटने से बचाव के लिए बाध्यता श्रेणी के जल, कुड़ा, और पानी जमा नहीं होने देना चाहिए। मछरों को बचाने के लिए आपको मैश नेट, बेड नेट, और मोशको-रिपेलेंट इस्तेमाल करना चाहिए।

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