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झौंका रतियाल, खरोटा, डुग्गी, बनाड़ा, समकेहड़, पपाहन पंचायतों की कहानी, कूहलें तो बनीं लेकिन नहीं मिला सिद्धाथा नहर का पानी। 

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झौंका रतियाल, खरोटा, डुग्गी, बनाड़ा, समकेहड़, पपाहन पंचायतों की कहानी, कूहलें तो बनीं लेकिन नहीं मिला सिद्धाथा नहर का पानी।

देख रही है कि कब लेंगें सुध

जवाली,,19 जनवरी, डा. जन के शर्मा : विधानसभा क्षेत्र जवाली के अधीन सिद्धाथा क्षेत्र की झौंका रतियाल, खरोट्टा, डुग्गी, बनाड़ा, समकेहड़, पपाहन पंचायतों में जमीनों को सिंचाई सुविधा मुहैया करवाने वाली करोड़ों की लागत से निर्मित सिद्धाथा नहर परियोजना का लाभ किसानों की जमीनों को नहीं मिल पा रहा है। लाखों रुपए खर्च करके कूहलों का निर्माण हो चुका है लेकिन कूहलों में आजतक पानी नहीं आया है। कूहलें टूट चुकी हैं तथा कई जगहों से मलबे से भर चुकी हैं। मलबे के भर जाने से कूहलों का अस्तित्व खत्म हो रहा है। पिछले काफी सालों से किसान इन कूहलों में पानी आने का इंतजार कर रहे हैं लेकिन किसानों की फरियाद सुनने वाला कोई नहीं है। बिना बारिश के जमीनों में बीजी हुई फसल सूख रही है तथा किसान काफी हताश हैं। किसानों ने कहा कि कूहल निर्माण के कारण हमारी जमीनों को कुरेद डाला गया लेकिन इसके बाद भी हमारी जमीनों को सिंचाई सुविधा नहीं मिल पाई।

झौंका रतियाल, खरोटा, डुग्गी, बनाड़ा, समकेहड़, पपाहन पंचायतों की कहानी, कूहलें तो बनीं लेकिन नहीं मिला सिद्धाथा नहर का पानी।

कूहलों में पानी आने के इंतजार में किसानों की आंखें पथरा गई हैं। अगर पानी ही नहीं पहुंचाना था तो सरकारी खजाने से लाखों रुपए खर्च करके कूहलों का निर्माण क्यों करवाया गया। किसानों की हजारों एकड़ जमीन सिद्धाथा नहर के पानी को तरस रही हैं। सिद्धाथा नहर परियोजना के अधिकारियों को कई बार अवगत करवाया गया लेकिन आश्वासनों के अलावा कुछ नहीं मिला। सरकार के नुमाइंदों से भी फरियाद लगाई परन्तु किसी ने भी कोई हल नहीं किया। पंचायतों के बाशिंदों ने कहा कि अब सरकार द्वारा ‘सरकार गांव के द्वार’ कार्यक्रम कर रही है लेकिन मंत्री चन्द्र कुमार बताएं कि आखिरकार सिद्धाथा नहर का पानी हमारे खेतों को सिंचाई सुविधा कब देगा। जनता ने मांग की है कि कूहलों में सिद्धाथा नहर का पानी पहुंचाकर खेतों को सिंचाई सुविधा मुहैया करवाई जाए।

किसानों की मांग, कूहलों की हो उच्च स्तरीय जांच.

किसानों ने कहा कि अगर कूहलों का पानी हमारी जमीनों को मिल जाता तो फसलों की पैदावार अच्छी होती तथा सब्जियां लगाकर हम अपनी आर्थिकी को भी मजबूत कर लेते। पानी न मिलने से जमीनें बंजर होती जा रही हैं। किसानों की आँखें भी पथरा गई हैं। अब तो कूहलों से जमीनों को पानी मिलना सपना बनकर रह गया है। किसानों ने कहा कि ठेकेदारों को लाभ देने के लिए कूहलों का निर्माण करवा दिया गया लेकिन किसानों को कोई लाभ नहीं मिल पाया। किसानों ने सरकार से मांग की है कि इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए तथा अधिकारियों/कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

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